Amaltas Golden Tree

आरगवध के

संग्रहण काल का उचित समय अभी अप्रैल मई
क्योंकि ये…
ONLY #SINGLE #DOSE EMPTY MORE THAN 3 KILOS OF WASTE (#FECES) AND #EMPTY YOUR #ABDOMEN

अनुभूत_प्रयोग

पेट का #कचरा साफ करने व #कब्ज की #अचूक #आयुर्वेदिक #दवा

अभी अप्रैल मई महीने में जब आप घर से बाहर निकलेंगे तो #अमलतास #Cassia_fistula के पेड़ पर फली लगी पाएंगे…इसको अभी एकत्रित कर रख ले पूरे वर्ष काम आएगी..
इसकी फली को अपने अंगुल से चार अंगुल लेकर इसको कूटकर छोटे छोटे टुकड़ों में कूटकर इसको 200 मिली लीटर पानी में आधे घंटे तक भिगोकर रख ले, फिर इसे धीमी आंच पर 20 मिनट तक उबाल लें, फिर इसमें 3 ग्राम सैंधा या लाहौरी नमक व 10 ग्राम गुड़ मिलाकर एक उबाल लगाकर उसे चलनी से छान लें, फिर उसे गुनगुना रहने पर रात को खाना खाने के 1 घंटे के बाद पी कर सो जाएं
नोट: इसका पुनः प्रयोग 7 दिन से पहले नहीं करे व पंजीकृत #आयुर्वेद #चिकित्सक की निगरानी में करे

अमलतास के पेड़ का परिचय : इसे #आरग्वध (संस्कृत), अमलतास (हिन्दी), #सोंदाल (बंगाली), #बाहवा (मराठी), #गरमालो (गुजराती), #कोंड़े (तमिल), #आरग्वघमु (तेलुगु), #खियारशंबर (अरबी) तथा #केसिया_फिस्टुला (लैटिन) कहते हैं।

अमलतास का पेड़ मध्यम आकार का 25-30 फुट ऊँचा होता है। तना सुदृढ़, मजबूत और छाल हरी-कत्थई रंग की और शाखाएँ सीधी होती हैं। इसके पत्ते लगभग 1 फुट लम्बे होते हैं, जो 12 से 18 इच्च तक की लम्बी सींको पर 8 से 16 जोड़े पत्रकों में लगे होते हैं। ये छोटे पत्ते (पत्रक) जामुन जैसे चौड़े और चिकने होते हैं। फूल पीले रंग के पत्तों के समान ही लम्बे और सुगंधित डंठल पर लगते हैं। इसकी फली 1-3 फुट लम्बी और 1 इच्च गोल, कच्ची अवस्था में हरी, पकने पर काली (ललाई लिये कत्थई रंग की) और बेलन के आकार की होती हैं। अमलतास के बीज चपटे, चिकने, काले, गोल फली और पैंसे के समान खण्डों में सिरस के आकार के, पीलापन लिये कत्थई रंग के होते हैं। अमलतास के फूल लगभग दो इंच व्यास के चमकीले, पीले रंग के होते हैं। अमलतास के फूल गंध रहित पर देखने में आकर्षित होते हैं।
यह प्राय: सब प्रान्तों में पाया जाता है।

रूप : मार्च से अप्रैल तक अमलतास के पेड़ की सभी पत्तियाँ झड़ जाती हैं। इसके बाद नए फूल और नई पत्तियाँ निकलते हैं। इसके बाद अमलतास की फली आती है जो तक़रीबन दो फुट लंबी और गोल लटकी होती है। अमलतास की फली के अंदर का भाग जो की अमलतास का गूदा होता है बहुत सारे कोष्ठों में बंटा होता है। अमलतास बेलन के आकार का सख्त होता है।

रासायनिक संघटन : इसके फल के गूदे में शर्करा 60 प्रतिशत, पिच्छिल द्रव्य, ग्लूटीन, पेकटीन, रंजक द्रव्य, कैलशियम, आक्जलेट, क्षार, निर्यास तथा जल होते हैं।

अमलतास के गुण : यह स्वाद में मीठा, कडुआ, पचने पर मीठा तथा शीतल, भारी, मृदु और चिकना होता है। इसका मुख्य प्रभाव त्वचा-ज्ञानेन्द्रिय पर कुष्ठध्न तथा आन्त्र पर मृदु-विरेचक रूप में पड़ता है। यह शोथहर, पीड़ा-शामक, रक्तशोधक, कफ-नि:सारक, मूत्रजनक, दाहशामक तथा ज्वरहर है

Published by Vaidya Vikas Nagi

I am Ayurvedic practioner. Working with full dedication to treat peopel . My aim is to bring healthy future.

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